उत्तर प्रदेश के कुछ छुपे खजाने

उत्तर प्रदेश की धरा संस्कृति, विरासतों और स्थापत्य-स्मारकों का गहरा सम्मिलन है। गंगा और यमुना के तटों पर प्राचीन काल से ही समृद्ध संस्कृति वाले नगर साख बनाते आये हैं। ये धरती गुजरे हुये कल और वर्तमान का सटीक मिश्रण है जो इसे और सुंदर बनाता है। एक तरफ आगरा, मथुरा, बनारस, अयोध्या जैसे शहर इसकी शान हैं तो अभी भी कई ऐसे अनछुए या कम नजरों से रूबरू हुए छोटे स्थल हैं जिन्हें अभी तक कम ही सैलानियों की नजरों ने देखा है। अतः इन्हीं स्थानों को उत्तर प्रदेश के छुपे खजाने का नाम दिया है जो इनकी संस्कृति और ऐतिहासिकता की समृद्धि के अनुरूप है।

दर्शनीय स्थल


सोनभद्र

सोनभद्र महाभारत काल के नायकों की भूमि है। यह स्थान शिवद्वार और रेणुकेश्वर मंदिर के लिए विख्यात है। कुदरत से प्यार करने वालों के लिए ये सचमुच एक खजाना ही है जहां लखनिया दरी, मुक्खा प्रपात और "विरले जीवों का अवशेष" उद्यान है जो आपकी यात्रा में सम्पूर्णता लाने में सक्षम है। यहाँ की प्रागैतिहासिक कालीन गुफा कला के चित्र महान् सांस्कृतिक धरोहरों की अनुभूति देते हैं। यहाँ के शासकों के यश-बल का प्रतीक शानदार विजयगढ किला भी सोनभद्र आने की वजह बनता है।

हस्तिनापुर

मेरठ जिले में स्थित हस्तिनापुर महाभारत के महासमर का शांत प्रत्यक्षदर्शी है। यहाँ तीन जैन तीर्थंकरों का जन्म बताया जाता है अत:हस्तिनापुर जैन अनुयायियों के लिए भी श्रद्धा का केन्द्र है। महाभारत के नायकों के मंदिर यथा पांडवों का मंदिर और फिर द्रौपदी का मंदिर आदि इस शहर की ऐतिहासिकता को और बल देते है।

कालिंजर

बांदा के समीप (झांसी से 280किमी दूर) कालिंजर अपने किले के लिए मशहूर है। मध्यकाल में इस किले की विशिष्ट सामरिक 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित कालिंजर किला सचमुच एक ऐतिहासिक खजाना है। विंध्य की खूबसूरत बलखाती पहाडियों के गोद में इसकी छाप आपके मन पर बहुत गहरी रहेगी। यहीं नीलकंठ महादेव का मंदिर है। हिन्दू संस्कृति की किवंदंती है कि यह मंदिर उसी स्थान पर बना है जहाँ भगवान शिव विष पान करने के बाद कुछ देर आराम करने के लिए रुके थे।

महोबा

महोबा, एक छोटा खूबसूरत कस्बा है जिसकी पहाडियों पर मंदिर है तो घाटियों में सुंदर तालाब। पहाड़ी के ऊंचे स्तर पर शानदार महोबा किला बना है जो चंदेल राजाओं की स्थापत्य कला अभिरूचि को दर्शाता है। आल्हा ऊदल गान, मूलत: महोबा के वीर बुंदेला योद्धाओं की शौर्यगाथाएं कहते हैं। यहाँ राहिला में 9वीं शताब्दी का गिट्टी पत्थर का बना विख्यात सूर्य मंदिर भी स्थापत्य का अनूठा रूप है।

बरुआ सागर

बेतवा नदी के तट पर स्थित बरूआसागर, जिला केन्द्र झाँसी के समीप है। इस जगह का नाम बरूआसागर ताल के नाम पर पडा, जिसे ओरछा के राजा उदय सिंह ने करीब 260 साल पहले बनवाया था। यहाँ का किला ऐतिहासिक पहाड़ी दुर्ग है, जहाँ 1744 में मराठों ने बुंदेलों से युद्ध किया था।

पारीछा

पारीछा, झाँसी से 25 किमी झाँसी कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेतवा नदी के किनारे स्थित है। यहाँ पारीछा बाँध और जलविद्युत ऊर्जा उत्पादन का केन्द्र है। बाँध के समीप कई जलक्रीडा कार्यक्रम उपलब्ध है और अथाह जलसंचय के जैसा मन को भा जाने वाला मनोरम दृश्य इसकी खूबसूरती के लिए आकर्षण का काम करता है।

कालपी

झाँसी - कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही जालौन जिले में यमुना तट पर छोटा कस्बा कालपी अवस्थित है। यहाँ भग्नावस्था में किले का अनूठा आकर्षण नजरों को पसंद आएगा। फिर चौरासी गुंबद जैसे स्मारक, पातालेश्वर मंदिर और महाभारत के रचियता कहे जाने वाले वेदव्यास का मंदिर आपके लिए सुखद अनुभव रहेंगे। ये शहर न सिर्फ प्राचीन स्थापत्यों के लिए बल्कि अपनी मिठाईयों के स्वादिष्ट विविध प्रकारों के लिए भी मशहूर है।