उत्तर प्रदेश: एक इतिहास

एक राज्य क्षेत्र के रूप में उत्तर प्रदेश का 4000 साल का समृद्ध अतीत रहा है। ये प्रदेश गंगा, यमुना और अनुश्रुतित सरस्वती नामक ऐतिहासिक नदियों का दोआब क्षेत्र है। ये वृहद ऊपजाऊ गंगा मैदान जो आज का उत्तर प्रदेश कहलाता है, इसने 2500 वर्षों से लेकर अब तक कई बड़े बड़े राज्यों साम्राज्यों के बनने बिगड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। देश की राजधानी, नई दिल्ली, के पूरब में बसे इस महती सामरिकता के क्षेत्र को आक्रमणकारी लुटेरों और शासकों ने हमेशा सत्ता साधने का महत्वपूर्ण साधन माना है।

जानिये "उत्तर प्रदेश"

इतिहास - कैसे बना प्रदेश?

इस धरती के हर मोड़ पर इतिहास नयी करवटें लेता आया है। यहाँ का इतिहास दासस के आगमन के साथ शुरू होता है। फिर 2000 ईसापूर्व आर्यों के आगमन ने वर्तमान हिन्दू संस्कृति की आरम्भिक नींव रखी थी। 400 ईसापूर्व के काल से नंद और मौर्य वंश ने जो साम्राज्य की परिधि बनाई उसके हृदय में शुंग, कुषाण, गुप्त, पाल, राष्ट्रकूट फिर मुगलों ने ये भू-भाग सुरक्षित बनाये रखा। उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के प्रेरणादायी अतीत की गाथा की भूमि भी रहा है। वर्तमान के प्रदेश में शानदार स्मारक, किले, संग्रहालय और अन्य सांस्कृतिक विरासतें सुंदर तारों से भरे गगन जैसे प्रतीत होती हैं।

कुछ साक्ष्य-

24 जनवरी का दिन उत्तर प्रदेश दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है।

 ब्रिटिश राज के दौरान संयुक्त प्रांत के रूप में 1अप्रैल 1937 को उत्तर प्रदेश राज्य बना

इसके पहले ब्रिटिश काल में 1902 तक इसे आगरा एवं अवध के उत्तर पश्चिमी प्रांत (एन डब्ल्यू पी ए) के नाम से जाना जाता था। 1902 में इसे आगरा एवं अवध के संयुक्त प्रांत का नाम दिया गया जिसे संक्षेप में संयुक्त प्रांत कहा जाता रहा था।

पहले, उत्तर प्रदेश की राजधानी फैजाबाद थी जो बाद में लखनऊ स्थानांतरित कर दी गई।

उत्तर प्रदेश, भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का गढ़ क्षेत्र रहा है।

उत्तर प्रदेश हिन्दी का हृदय प्रदेश भी है। यहाँ से अतीत में संत कबीर, तुलसीदास, सूरदास, विष्णु शर्मा, मलिक मोहम्मद जयसी फिर आधुनिक काल में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा जैसे महान् व्यक्तित्व हुए हैं जिनके प्रयासों से हिन्दी फली फूली है।

हिन्दी, अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुन्देली और अंग्रेजी यहाँ बोली जाने वाली मुख्य बोलियाँ हैं।

अन्य राज्यों से बढकर उत्तर प्रदेश की सीमा सबसे ज्यादा 9 राज्यों से मिलती है - उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड और बिहार।

उत्तर दिशा में उत्तर प्रदेश नेपाल के साथ भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करता है।

उत्तर प्रदेश भारत में जनसंख्या के मामले में शीर्ष स्थान पर और क्षेत्रफल में ऊपर से चौथे स्थान पर है।

दायरे के आधार पर लखामपुर खीरी उत्तर प्रदेश का सबसे बडा जिला है।

उत्तर प्रदेश, भारत की आध्यात्मिक राजधानी - वाराणसी, भारत की इत्र राजधानी - कन्नौज और भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर का गृहप्रदेश है।

कर्मचक्र की धरा उत्तर प्रदेश महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि रही है। यही सारनाथ में गौतम बुद्ध ने अपना पहला ज्ञानोपदेश दिया था।

उत्तर प्रदेश, भारत के आध्यात्मिक केंद्रों की भूमि है जहाँ भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा, भगवान रामचन्द्र की जन्मभूमि अयोध्या और तीर्थों में पवित्रतम तीर्थराज प्रयाग (इलाहाबाद) अवस्थित है।

शास्त्रीय नृत्यों में से एक विख्यात "कत्थक" का मूल स्थान उत्तर प्रदेश है। सारस राजकीय पक्षी और स्वाम्प हिरन राजकीय पशु है।

इतिहास के मुख्य पड़ाव -

  • आर्य काल/वैदिक काल
  • बौद्ध मत की उत्पत्ति
  • उत्तर वैदिक काल
  • ईसापूर्व समय
  • कुषाण साम्राज्य
  • चंदेलों का उद्भव
  • मुस्लिम शासकों का शासनकाल
  • ताजमहल
  • प्रयाग का पुनः नामकरण
  • राजधानी स्थानांतरण
  • 1857: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
  • संयुक्त प्रांत से उत्तर प्रदेश तक
  • उत्तराखंड का उत्तर प्रदेश से विलग होना

मौसम

उत्तर प्रदेश को तीन प्रकार के मौसम यथा शीतकाल, ग्रीष्मकाल और वर्षाकाल (मानसून) में बांट कर मौसम की समझ मिलती है। मुख्यतः जून से सितम्बर तक मानसून फिर दिसम्बर से फरवरी तक शीत ऋतु और मार्च से मई-जून तक गर्मी का मौसम रहता है।

पर्यटन हेतु सबसे उपयुक्त समय

पूरे उत्तर भारत के समान ही गर्मी का मौसम उत्तर प्रदेश में भी गर्म और उमस भरा रहता है इसलिए नवम्बर से मार्च यानी सर्दी के मौसम में घूमने फिरने के लिए सही मौसम मिलता है।

मार्च से मई (हल्का मौसम)

पैसावसूल दृश्यदर्शन और वन्यजीव रोमांच के अनुभव के लिए मार्च से मई के बीच राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य आपके लिए सबसे उपयुक्त सैरसपाटा रहेगा। जानकारी के लिए याद रखें कि 15जून से 15नवम्बर के बीच राष्ट्रीय उद्यान जनसामान्य की सैर के लिए बंद रहते है।

जून से सितम्बर (मध्य ऋतु)

जिन्हें मानसून से प्यार है, बारिश की बूंदें जिनको अच्छा एहसास कराती है, उनके लिए उमस के बावजूद उत्तर प्रदेश की सैर खुशनुमा होगी। बारिश के दिनों में यहाँ मैदानी क्षेत्र सबसे ज्यादा हरे भरे रहते है।

अक्टूबर से फरवरी (सुयोग्य मौसम)

ये महीने उत्तर प्रदेश घूमने-जानने के सबसे बेहतर पल देते हैं। ज्यादातर उत्सव और मेले भी इसी दौरान उत्तर प्रदेश की रौनक बढाते हैं। दिसम्बर जनवरी की कड़ाके की सर्दी के बावजूद ये सैलानियों के लिए सबसे उपयुक्त समय रहता है।