उत्तर प्रदेश : फिल्म शूटिंग स्थल

साल दर साल बॉलीवुड की पिक्चरों में उत्तर प्रदेश की भूमिका पटकथाओं में निखर कर आती रही है क्योंकि यहीं मिलता है असली भारत, ऐतिहासिक भारत, और क्षेत्रीय हिन्दुस्तान। 1960 की मुगल ए आज़म से लेकर 2017 की जॉली एल एल बी 2 तक, उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत और संस्कृति, फिल्म निर्देशकों के लिए "एक स्थान - सभी निदान" की सम्पूर्णता प्रदान करती आयी है और उनकी सफलताओं में केन्द्रीय भूमिका निभाता रहा है। ये प्रदेश अपने आप में किसी भी निर्माता निर्देशक और घूमने-फिरने वालों को आकर्षित करने के लिए कई वजहें समेटे हुए है। उत्तर प्रदेश की धरा ने फिल्म जगत में उमराव ज़ान, परदेश, सुल्तान, यंगिस्तान, बरेली की बरफ़ी, टॉयलेट: एक प्रेमकथा जैसी फिल्मों के लिए शानदार पटकथाएँ प्रदान की और फिर हॉलीवुड की कई फिल्मों का फिल्मांकन यहाँ फिल्माया गया वो चाहे औस्कर विजेता स्लमडॉग मिलियेनियर हो या ईट, प्रे एंड लव हो। लोगों के दिलों में बस चुकी आगरा की ऐतिहासिक फिजाओं में, बनारस के शानदार घाटों पर, मथुरा की कुंज गलियों में या लखनऊ के सांस्कृतिक विरासती माहौल ने इन पिक्चरों के फिल्मांकन को आदर्श अनुकूल स्थिति प्रदान की जो इनकी सफलता में महत्वपूर्ण साबित होती आई है।

फिल्मों के दर्शनीय स्थल


लखनऊ

उत्तर प्रदेश में कई सुपरहिट फिल्मों का फिल्मांकन हुआ है। लखनऊ की शानो-शौकत और नबावी रिहायशी अंदाज ने 1981 की फिल्म उमराव जान के लिए 18वी सदी के सटीक फिल्मांकन की आवश्यकता को बखूबी पूरा किया।रूमी दरवाजा, इमामबाडा और पुरानी चौड़ी सड़कों ने लखनउवा अंदाज में कई फिल्मों को सेट से ज्यादा जीवंतता प्रदान की है। पुराने बाजार और दोराही चौक जैसे देसी तड़के ने यहाँ फिल्माई गई

वाराणसी

खूबसूरत घाट, भव्य मंदिरों और बनारसी गलियों के साथ काशी ने बड़े पर्दे पर अपनी अमिट पहचान बनाई है जो रांझणा, मसान, बनारस और हाफ गर्लफ्रेंड जैसी अच्छी फिल्मों को पूर्णता प्रदान करते है। इसके साथ-साथ बनारस के महाराज का लाल पत्थर से निर्मित पुश्तैनी रामनगर किला भी रांझणा, गैंग्स औफ वासेपुर, लागा चुनरी में दाग में फिल्माया गया है। फिर खई के पान बनारस वाला जैसे गाने आज भी लोगों की पसंद है।

आगरा

विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्थापत्य कला के नामों में शुमार आगरा के ताजमहल ने कई सफल फिल्मों जैसे कि बंटी और बबली, मेरे ब्रदर की दुल्हन, यंगिस्तान, तेवर आदि की शूटिंग में चार चांद लगाये है। प्रेम के प्रतीक कहे जाने वाले ताजमहल को किसी भी पिक्चर में प्रेम भाव दर्शाने या रूमानी सीन के लिए उपयोग किया जाता रहा है। ताजमहल के अलावा महताब बाग, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को स्लमडॉग मिलियेनियर और तेवर जैसी फिल्मों में निर्देशकों ने कैमरे में कैद करके बड़े पर्दे पर उतारा है। उत्तर प्रदेश की रची बसी सांस्कृतिक विविधता और विरासतों ने बरसों से कहानीकारों और निर्देशक निर्माताओं को इसी माहौल की कहानियों पर फिल्में बनाने को और आपको अपने घर के सोफे से उठकर बालकनी टिकट लेकर सिनेमा हॉल तक जाकर फिल्म देखने को प्रेरित किया है।

उत्तर प्रदेश में शूट की गयी कुछ मुख्य फिल्में