कला और शिल्प

प्रामाणिक कला और शिल्प के माध्यम से भारत को देखना एक अनोखा और अभूतपूर्व अलग सा अनुभव है। लोकप्रिय रूप से “भारत के केन्द्र-स्थल ” के रूप में जाने जाने वाले उत्तर प्रदेश को इसकी लंबी जीवंत कलात्मकता के कारण हमेशा प्रशंसा मिलती रही है। प्रस्तर-शिल्प, मिट्टी के बर्तन, चिकनकारी, जरी कढ़ाई, कांच के बने पदार्थ, कपड़ा छपाई, इत्र का आसवन और कालीन बुनाई उत्तर प्रदेश की कुछ खासियतें हैं। ये कलात्मक प्रयास प्रागैतिहासिक काल के से ही राज्य का एक हिस्सा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुगल शासनकाल में प्रस्तर शिल्प और स्थापत्य कला का विकास हुआ है। आगरा में ताजमहल जटिल नक्काशी, संगमरमर पट्टियों की कलाकृतियों और पुनर्निर्माण के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है। मिट्टी के बर्तन राज्य में शिल्प का एक बहुत लोकप्रिय रूप है। मिट्टी से बने बर्तन सुंदर फूलों के कलाकृतियों और पैटर्न के साथ सुशोभित होते हैं। चिकनकारी एक कुशल कढ़ाई है, जो शिफॉन, काटन, जौर्जट आदि कपड़ों पर होती है। यह कढ़ाई लखनऊ से खरीदी जाने वाली सबसे लोकप्रिय बाजार वस्तुओं में शुमार है। ज़री कढ़ाई अपनी समृद्ध आभा के लिए प्रसिद्ध है। पारंपरिक धागे का काम वास्तविक सोने या चांदी से बने धागे का उपयोग करके किया जाता है। अतः इसकी सामग्री अधिक महंगी होती है।

महत्वपूर्ण स्थल

शंसापत्र