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नैमिषारण्य

नैमिषारण्य (नीमसार) का भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, देवी सती और भगवान शिव से जुडीं हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है। यह स्थान इस मान्यता के कारण अद्वितीय है कि यहाँ 33 हिंदू देवी देवताओं के मन्दिर हैं। यह हिंदुओं के सभी तीर्थस्थल केंद्रों में सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई इस जमीन पर 12 साल के लिए तपस्या करता है तो ब्रह्मलोक में जाता है। यह जगह सीतापुर जिले में गोमती नदी के तट पर लखनऊ से 94 किलोमीटर दूर स्थित है। इस जगह का महाभारत समेत कई प्राचीन ग्रंथों में एक घने जंगल के रूप में उल्लेख मिलता है। विभिन्न मंदिरों को देखने के लिए यहाँ की एक दिन की यात्रा निश्चित रूप से सार्थक है। 

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प्रयागराज

प्रयागराज गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित एक सुंदर शहर है। यह शहर दुनिया भर से तीर्थ यात्रियों और विरासत प्रेमियों का ध्यान आकर्षित करता है क्योंकि यह शहर पौराणिक और आध्यात्मिक सौंदर्य से भरा हुआ है। प्रयागराज पवित्रता,धर्म, परंपराओं, इतिहास और वास्तुकला का मिश्रण है जो ऐतिहासिक से लेकर धार्मिक सभी प्रकार के अनुभव प्रदान करता है। प्रयागराज उन स्थलों में से एक है जहाँ कुंभ मेला लगता है और श्रद्धालुओं की भारी संख्या एकत्र होती है। मुगलों के लिए इस शहर का अपने साम्राज्य को नियंत्रित करने की दृष्टि से अत्यधिक सामरिक महत्व था और फिर ब्रिटिश युग में यहएक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बन गया। यह शहर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई प्रमुख गतिविधियों का केंद्र था। यहाँ कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेताओं का जन्म हुआ। प्रयागराज ने हिंदी और उर्दू साहित्य के विकास में भी प्रमुख भूमिका निभाई है।

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विन्ध्याचल

विंध्याचल गंगा नदी के किनारे मिर्जापुर जिले में स्थित शहर है। यहदेवी विंध्यवासिनी का शक्तिपीठ है जो देश में प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक है।प्राचीन ग्रंथों में वर्णित देवी विंध्यवासिनी को तत्काल आशीष प्रदान करने वाली देवीमाना जाता है। इस स्थान पर देवी को समर्पित अनेकों मंदिर है। यह पवित्र स्थान पर्यटकों को प्राकृति के विभिन्न आश्चर्यों  के करीब आने का  मौका प्रदान करता है। हालांकि, विंध्याचल धार्मिक उत्साह की हलचल से भरा शहर है, पर यहाँ कोई भी ऐसा शांत पक्ष नहीं है जो पर्यटकों द्वारा छोडने लायक हो। गंगा नदी के तट पर स्थित यह प्रकृति प्रेमियों को अपने हिस्से का हरित परिदृश्य भी प्रस्तुत करता है।

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अयोध्या

अयोध्या फैज़ाबाद जिले में सरयू नदी के तट पर स्थित है। भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का प्रतिनिधित्व करने वाली अयोध्या प्राचीनकाल से ही धर्म और संस्कृति की परम -पावन नगरी के रूप में सम्पूर्ण विश्व में विख्यात रही है। अयोध्या की माहात्म्य व प्रशस्ति वर्णन से इस नगरी के महत्व और लोकप्रियता का स्वयं ही अनुभव हो जाता है। मर्यादा पुरोषत्तम भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन से गौरवान्वित इस पावन नगरी के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र और सुरसरि गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने वाले राजा भगीरथ सिरमौर रहे है। जैन धर्म के प्रणेता श्री आदिनाथ सहित पाँच तीर्थंकर इसी नगरी में जन्मे थे। चीनी यात्री द्वय फाह्यान व ह्वेनसांग के यात्रा -वृत्तान्तों में भी अयोध्या नगरी का उल्लेख मिलता है। 

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बिठूर

बिठूर, कानपुर से 27 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक शांत और सुंदर स्थल है। गंगा नदी के तीर पर बसे बिठूर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। बिठूर शहरों की भीड़ भाड़ से परे शांतिपूर्ण वातावरण में सुकून भरा समय बिताने के लिए उत्तम स्थान है। ये जगह हिन्दू संस्कृति के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र भी है। बिठूर का जिक्र अतीत के पन्नों में कई पांडुलिपियों में मिलता है। कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने संसार का नाश करके पुनः सृष्टि की थी तब भगवान ब्रह्मा ने यहाँ निवास किया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा के द्वारा यहाँ मानव जाति की रचना की गई और उन्होंने एक अश्वमेध यज्ञ भी किया। ब्रह्मा जी से करीब का नाता होने के कारण इस स्थल का नाम ब्रह्मावर्त पडा जो कालांतर में बिठूर कहलाने लगा। कानपुर और लखनऊ वालों के लिए तो बिठूर शानदार सप्ताहांत घूमने की जगह है। 

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सारनाथ

वाराणसी से 10 किमी की दूरी पर स्थित, सारनाथ एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। बोध गया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने यहाँ अपना पहला धर्मोपदेश दिया था। उनका पहला धर्मोपदेश महा धर्मचक्रप्रवर्तन के रूप में पवित्र है,जिसका अर्थ है 'धर्म चक्र की गति'। भगवान बुद्ध के समय इस क्षेत्र को हिरणों के रहने वाले घने जंगल के कारण इसे ऋषिपट्टन या इसिपटन और मृगदावा कहा जाता था। अपने शासनकाल में सम्राट अशोक भगवान बुद्ध के प्रेम और शांति के संदेश का प्रचार प्रसार करने सारनाथ आए और यहाँ ईसा पूर्व 249 में  एक स्तूप का निर्माण करवाया। आज सारनाथ बौद्ध पंथ के मुख्य स्थलों में से एक है, जो दुनिया भर से अनुयायियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। शहर मठ, स्तूप और एक संग्रहालय के साथ सुशोभित है।

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चित्रकूट

चित्रकूट का अर्थ है "कई आश्चर्यों से भरी पहाड़ी" यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के राज्यों में फैले पहाड़ों की उत्तरी विंध्य श्रृंखला में है। भगवान राम ने यहाँ अपने वनवास का बहुत समय बिताया। महाकाव्य रामायण के अनुसार,चित्रकूट में भगवान राम के भाई भरत ने उनसे मुलाकात की और उनसे अयोध्या लौटने और राज्य पर शासन करने के लिए कहा। यह माना जाता है कि हिंदू धर्म के सर्वोच्च देवता  (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) यहाँ अवतार ले चुके हैं। यहाँ कई मंदिर और कई धार्मिक स्थल हैं। इस धरा पर संस्कृति और इतिहास के सुन्दर संयोजन की झलकियाँ हैं। चित्रकूट आध्यात्मिक आश्रय स्थल है। जो लोग अनजानी और अनदेखी जगहों के प्रति रुचि रखते हैं उन यात्रियों की यहाँ लगभग पूरे साल भीड़ रहती है । चित्रकूट देवत्व, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का एकदम सही मेल है।

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संकिसा

फर्रुखाबाद से 47 किलोमीटर दूरी पर स्थित, संकिसा को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के वर्तमान गांव बसंतपुर के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि संकिसा उस स्थान पर है जहाँ भगवान् बुद्ध सोने की सीढ़ी से स्वर्ग से उतरे थे। यह रामायण में संकश्या के रूप में जाना जाता है। यह शहर प्राचीन समय से भारत के भूगोल में एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ह्वेन सांग ने इस यात्रा के दौरान इस शहर का नाम कपित्थ दिया। यहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा करायी गयी खुदाई में भगवान् बुद्ध और सम्राट् अशोक से सम्बन्धित अवशेष मिले है जिन्होंने बुद्ध काल के बारे में हमारी जानकारी में इजाफा किया है। सैलानियों का मन मोह लेने लायक, ये अति सुंदर सेरेलिक्स कला के उच्च स्तर का प्रतिनिधित्व करते है। लिपि लेख, मृण्मूर्तियाँ, कांस्य के सिक्के और पत्थर के बर्तन इसे आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। यहाँ विराजमान शिवलिंग देश विदेश से आये पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है।

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फतेहपुर सीकरी

फतेहपुर सीकरी एक एतिहासिक शहर है जो 1569 में मुगल सम्राट् अकबर ने स्थापित किया था और 1571 से 1585 तक मुगल साम्राज्य की राजधानी था। यह शहर आगरा से40 किमी दूर है। ऐसा कहा जाता है कि अकबर सीकरी नामक शहर में रहने वाले संत शेख सलीम चिश्ती के पास गये थे, जिनके आशीर्वाद से अकबर के 3 बेटे हुए। कृतज्ञता ज्ञापन के रूपमें अकबर ने सीकरी में एक नया शहर बनाया और अपनी नई राजधानी का नाम फतेहपुर सीकरी("विजय का शहर") रखा। फतेहपुर सीकरी मुगल वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है। यहाँ एक शानदार मस्जिद, बुलंद दरवाजा, दीवान-ए-आम जैसी कई लुभावनी जगहेंहैं। यह शहर भारत-इस्लामी प्रकार की उत्कृष्ट कृति था लेकिन पानी की कमी के कारण इसे जल्द ही छोड़ दिया गया। फतेहपुर सीकरी की यात्रा मुगल संस्कृति और इतिहास की यात्रा जैसी है। यहाँ सभी स्मारक मुगल और फारसी वास्तुकला के मिश्रण हैं।

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