वाराणसी

काशी के रूप में वर्णित वाराणसी या बनारस शहर भारत की समृद्ध विरासत को अपने आप में संजोये हुए है। यह प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति, दर्शन, परंपराओं और आध्यात्मिक आचरण का एक आदर्श सम्मिलन केंद्र रहा है। यह सप्त पुरियों यथा प्राचीन भारत के सात पवित्र नगरों में से एक है। बनारस शहर गंगा नदी के किनारे पर स्थित है। गंगा की दो सहायक नदियाँ वरुणा और अस्सी के नाम पर इसका नाम वाराणसी हुआ। काशी- पवित्र शहर, गंगा- पवित्र नदी और शिव - सर्वोच्च भगवान, ये तीनों वाराणसी को एक विशिष्ट स्थान बना देते हैं। आज वाराणसी सांस्कृतिक और पवित्र गतिविधियों का केंद्र है। विशेष रूप से धर्म, दर्शन, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, नृत्य और संगीत सीखने के क्षेत्र में निश्चित रूप से ये नगर अद्वितीय स्थान रखता है। बनारसी रेशमी साड़ी और ज़री के वस्त्र दुनिया भर में अपनी भव्यता के लिए जाने जाते हैं। वाराणसी का हर कोना आश्चर्यों से भरा है। अतः जितना अधिक इसे देखते हैं, उतना ही इसमें खोते जाते हैं।

मुख्य आकर्षण

श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर

शहर के मुख्य देव भगवान शिव को समर्पितश्री काशी विश्वनाथ मंदिर एक प्रमुख पवित्र आकर्षण है। बारह ज्योतिर्लिंगों में सेएक शिवलिंग इस मंदिर में है। यह प्रकाश का अग्निमय स्तंभ है, जिसके द्वारा भगवान शिवने अपने दिव्य वर्चस्व को...

संकटमोचन मन्दिर

संकटमोचन मंदिर, प्रभु हनुमान को समर्पित शहर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह पौराणिक नदी अस्सी के किनारे पर स्थित है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी को विशेष रूप से "संकट मोचन" नाम दिया था, जिसका मतलब मुसीबतों से...

अस्सी घाट

प्राचीन इतिहास के अनुसार यह कहा जाता है कि देवी दुर्गा (भगवान शिव की पत्नी) ने राक्षस शुम्ब-निशुम्ब को मारने के बाद अपनी तलवार नदी में (अस्सी नदी) में फेंक दी थी। "अस्सी साइम्बेदा तीर्थ" के रूप में अस्सी घाट काशी खण्ड में...

जैन मंदिर

उत्तर प्रदेश में जैन धर्मजैन साहित्य में काशी या वाराणसी को जैन तीर्थ (पवित्र स्थान) के रूप में बताता है, क्योंकि चार जैन तीर्थंकर का जन्म वाराणसी में हुआ था। जैन परंपरा के अनुसार, वाराणसी 7वें जैन तीर्थंकर श्री सुप्रशवनाथ,...

तुलसीमानस मन्दिर

1964 में निर्मित तुलसी मानस मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह सफेद संगमरमर से बना है। इसका सुंदर उद्यान इसके आकर्षण को और बढाता है। मंदिर भगवान राम को समर्पित है और बनारस के सुरेका परिवार द्वारा निर्मित...

वाराणसी में ख़ास


भोजन

उत्तर प्रदेश भोजन प्रेमियों के लिए विभिन्न विकल्पों की पेशकश करने वाले विविध व्यंजनों का देश है। पहले कभी नहीं जैसे भोजन का अनुभव करने के लिए राज्य पर जाएं।

आयोजन

उत्तर प्रदेश विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का मिश्रण है जिसमें विभिन्न आयोजनों और त्योहारों का आयोजन किया जाता है। समृद्ध संस्कृति का अनुभव करने के लिए राज्य पर जाएं।

मुख्य कार्य कलाप

उत्तर प्रदेश विविधता, संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं का केंद्र है। अंतहीन गतिविधियों का अन्वेषण करें और इसमें शामिल हों।

शंसापत्र

कैसे पहुंचे?

फ्लाईट

लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर वाराणसी से 22 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ के लिये सीधी उड़ानें दिल्ली, आगरा, खजुराहो, कलकत्ता, मुंबई, लखनऊ, और काठमांडू (नेपाल) से उपलब्ध हैं।

बस

आप किसी भी बड़े शहर से वाराणसी तक सड़क के माध्यम से आ सकते हैं। कुछ शहरों से सड़क की दूरी इस प्रकार है: आगरा -565 कि.मी., इलाहाबाद- 128 कि.मी., कानपुर 330 कि.मी., लखनऊ- 286 कि.मी. और सारनाथ -10 कि.मी.।

ट्रेन

वाराणसी, मंडुआडीह और मुगल सराय महत्वपूर्ण रेल जंक्शन हैं जो सभी महत्वपूर्ण शहरों से जुड़े हैं। ये स्टेशन सबसे नज़दीकी हैं और इन स्टेशनों से नियमित रेलगाड़ियां चलती हैं।

पर्यटक मार्गदर्शक

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  • मोबाइल : 9871097614
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  • ज्ञात भाषा : JAPANESE, ENGLISH
  • नाम : माधव सिंह
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  • लाइसेंस : 573
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