वन्यजीव-पर्यावरण परिपथ

उत्तर प्रदेश राज्य में तराई के क्षेत्र में सबसे समृद्ध जीव पर्यावास मिलते हैं। ये समृद्ध हरित क्षेत्र वन्य जीवों और जीव जन्तुओं की विविध प्रजातियों केबडे़ पर्यावास हैं। यह साहसिक कार्यों और वन्यजीव पर्यटन के लिए इन क्षेत्रों को एक आदर्श गंतव्य बनाता है। यहाँ आप विभिन्न प्रकार के जन्तु जैसे बाघ, हाथी, हिरण, मगरमच्छ और डॉल्फ़िन के साथ उत्तम पक्षी प्रजातियाँ और वनस्पति वैविध्य देख सकते है। यह एक प्रकृति प्रेमी के लिए एक सपना पूरा होने जैसा है। उत्तर प्रदेश अपने वन्य जीवन और पर्यावरण क्षेत्रों को बचाने और बढ़ावा देने के लिए भी विभिन्न कदम उठा रहा है।

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान बाघ, तेंदुए और विभिन्न प्रकार के हिरण, मृग, हाथियों और पक्षियों का घर है। यह जगह तराई तलहटी के शांत और निस्तब्ध हरित क्षेत्र में स्थित है, जो कि लखनऊ शहर से करीब 225 किलोमीटर दूर है। यहाँ के समृद्ध हरित वन और यहाँ से बहने वाली नदियाँ आपको जंगल का संपूर्ण अनुभव देंगी। यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श सप्ताहांत का प्रवेश द्वार है।

कतर्निया घाट

कतर्निया घाट वन्यजीव अभयारण्य दुधवा टाइगर रिजर्व का एक हिस्सा है। यह स्थान दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और किशनपुर वन्यजीव अभ्यारण्य के साथ प्रबंधित किया जाता है। इस जगह पर हरे भरे वन हैं और लखनऊ से लगभग 200 किमी दूर बहराइच जिले में है। कतर्निया घाट में बाघ, तेंदुए, हिरण और मृग हैं। कतर्निया घाट के अंदर गिरवा नदी बहती है, इसके ताजे पानी में डॉल्फ़िन्स रहती हैं। यह एक सुंदर जगह है जो नगरीय भीड़ भाड़ से दूर शांतिपूर्ण स्थान है।

पीलीभीत

पीलीभीत बाघ अभयारण्य उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बहराइच के जिलों में भारत-नेपाल सीमा पर हिमालय की तलहटी और तराई क्षेत्र के मैदानों में स्थित है। यह जगह भारत के प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व में से एक है। यहां के घने जंगल बाघों के जीवित रहने के लिए उन्हें अच्छे शिकार का आधार देते रहे हैं। ये संरक्षित क्षेत्र 127 से अधिक पशुओं, 556 प्रकार की पक्षी प्रजातियों और 2100 फूल पौधों का संयुक्त पर्यावास है। यह प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। पर्यटक यहां बाघ, भारतीय तेंदुए,...

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