बुन्देलखण्ड परिपथ

ये क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला है। यहाँ आप अभी भी ऐश्वर्य और शौर्य के निशानों से परिपूर्ण महलों और किलों के देख सकते है। इस क्षेत्रकी इतिहास के हर स्तर पर शौर्य और वीरता की कहानियां है और यहां के स्थापत्य उस बीते अतीत की गवाही देते है। बुंदेलखंड परिपथ में पांच शहर बिठूर, चित्रकूट, झाँसी, कालिंजर,और महोबा शामिल हैं।

महोबा

महोबा एक छोटा सा शहर है जो पहाड़ी और घाटी पर स्थित इसकी असंख्य झीलों और मंदिरों के लिए जाना जाता है। चंदेल राजाओं द्वारा बनाई गई ये झीलें और पहाड़ी किला अभियांत्रिकी कौशल का उदाहरण है। यहां की लोकगाथाएँ “आल्हा” और “ऊदल” के गौरव के दिनों की प्रेरणादायक गाथा बताती हैं। ये दो महान योद्धा भाई थे जिन्होंने अपने राज्य के सम्मान के लिए अपनी जान का बलिदान दिया था। राहिला स्थित सूर्य मंदिर 9वीं शताब्दी की एक अद्वितीय ग्रेनाइट संरचना है। इस मंदिर की वास्तुकला खजुराहो में पाए जाने मंदिरों के समान हैं।

कालिंजर

कालिंजर शहर झांसी से 280 किमी. दूर और बांदा के नजदीक है। यहाँ पर कालिंजर का प्राचीन किला है जो मध्ययुगीन काल में रणनीतिक महत्व रखता था। यह 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। विंध्य पर्वत की भूआकृति किले को एक विशिष्ट आकर्षण देती है, जो हर किसी के दिलो-दिमाग में लंबे समय तक रहता है। यहां प्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर भी है, जो कि पौराणिक कथाओं के अनुसार उस जगह पर बनाया गया है जहां समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर लौटते वक्त भगवान शिव कुछ समय आराम करने के लिये रुके थे।

झांसी

झाँसी शहर प्रसिद्ध बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए प्रवेश द्वार है जो कि वीरता और साहस की अपनी कहानियों के लिए जाना जाता है। झांसी की भूमि रानी लक्ष्मीबाई जैसे विलक्षण व्यक्तित्व वाले लोगों से जुड़ी हुई है, जिन्होंने 22 साल की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। चन्द्रशेखर आजाद, पंडित परमानंद, भगवानदास महौर और अन्य लोगों ने यहाँ से स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया। इस सुरम्य शहर में कई मंदिर और भव्य किला दर्शनीय स्थल है।

चित्रकूट

चित्रकूट का अर्थ है "कई आश्चर्यों वाली पहाड़ी"। यह स्थान नाम के मुताबिक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के राज्यों में फैले पहाड़ों की उत्तरी विंध्य श्रेणी में है। भगवान राम ने यहां अपने वनवास का एक बड़ा भाग बिताया। यह शहर मंदाकिनी नदी के पास है। चित्रकूट आने वाले लोग तसल्ली और मन की शांति का अनुभव करते हैं। यहाँ हनुमान धारा, कामद गिरि, स्फटिक शिला और राम घाट एवं अन्य कुछ जगह हैं।

बिठूर

बिठूर एक छोटा आध्यात्मिक ऐतिहासिक केन्द्र है जो कानपुर के बाहरी इलाके में पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है। बिठूर शहर मंदिरों से भरा है। यहाँ कुछ ऐतिहासिक जगहें जैसे वाल्मीकि आश्रम, ब्रह्मवर्त घाट, ध्रुव टीला और नानासाहेब के महल विशेष रूप से दर्शनीय हैं। ध्रुव का टीला सूर्योदय और सूर्यास्त पर गंगा के विशाल विस्तार का एक शानदार दृश्य प्रदर्शित करता है।

शंसापत्र