जैन परिपथ

भारत की धरती पर प्रचलित अनेक धर्मों में जैन धर्म प्राचीन धर्मों में से एक है। उत्तर प्रदेश राज्य में जैन धर्म से जुड़ी कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं विद्यमान है। उत्तर प्रदेश में कई जैन मंदिर हैं, जो जैन तीर्थंकरों के जीवन और व्यक्तित्व को दर्शाते हैं जिन्होंने हमेशा अहिंसा, प्रेम और ज्ञान का संदेश फैलाया। उत्तर प्रदेश राज्य में उन सभी लोगों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र है जो महान जैन वास्तुकला का सौंदर्य देखने चाहते हैं।

श्री संभवनाथ

श्री संभवनाथ जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर है। उनका जन्म श्रावस्ती शहर में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन हुआ था। यह कहा जाता है कि उन्होंने ध्यान से परम ज्ञान प्राप्त किया।

श्री सुपार्श्वनाथ

श्री सुपार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी में गंगा नदी के तट पर स्थित भदनी मुहल्ला में हुआ था। यह

श्री धर्मनाथ

श्री धर्मनाथ का जन्म माघ महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन रत्नापुरी में हुआ था। वे जैन धर्म के 15 वें तीर्थंकर थे। उनके पिता राजा भानु थे और माता सुव्रता देवी थीं।

श्री चंद्रप्रभु

8 वें जैन तीर्थंकर श्री चंद्रप्रभु का जन्म चंद्रपुरी शहर में हुआ था, जो गंगा नदी के तट पर वाराणसी से लगभग 20 किमी दूर स्थित है। श्री चंद्रप्रभु का जन्म इक्ष्वाकु वंश में राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा देवी के यहाँ हुआ था।

श्री आदिनाथ

श्री आदिनाथ को भगवान ऋषभदेव भी कहा जाता है जो प्रथम तीर्थंकर है। ये अयोध्या में पैदा हुए थे। इन्होंने कालनिरपेक्ष यात्रा की और जैन धर्म का ज्ञान सभी को सिखाया।

श्री सुविधाननाथ

श्री सुविधाननाथ 9 वें तीर्थंकर है जिन्हें भगवान पुष्पदंत के रूप में भी जाना जाता है। श्री सुविधाननाथ मोक्ष को प्राप्त हुए थे। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के काकंडी क्षेत्र में इक्ष्वाकु वंश में राजा सुग्रीव और रमा देवी के यहाँ हुआ था।

श्री अजितनाथ

श्री अजितनाथ दूसरे तीर्थंकर है जो अयोध्या में बकसारिया तोला में पैदा हुए थे। इस जगह को बेगमपुरा भी कहा जाता है। यहाँ उनके लिए समर्पित एक मंदिर है जिसे

श्री शीतलनाथ

श्री शीतलनाथ का जन्म भादिलपुर में हुआ था। वे जैन धर्म के 10 वें तीर्थंकर हैं। श्री शीतलनाथ का जन्म माघ माह के कृष्ण पक्ष के 12 वें दिन राजा द्रिध्रथ और नंदादेवी के यहाँ हुआ था।

श्री श्रेयांशनाथ

जैन धर्म के 11 वें तीर्थंकर श्री श्रेयांशनाथ का जन्म सिंहपुरी में हुआ था, जो सारनाथ के पास है। जैन गाथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है, वे सिद्ध हो गये, एक स्वतंत्र आत्मा जिसने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर दिया है। भगवान श्रेयांशनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश के राजा विष्णु और रानी विष्णु देवी के यहाँ हुआ था। उनका जन्मदिन भारतीय कैलेंडर के फालगुन महीने के कृष्ण पक्ष के 12 वें दिन हुआ था।

श्री अभिनंदननाथ

श्री अभिनंदननाथ का जन्म अयोध्या में रामकोट मुहल्ला में हुआ था। वह जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर थे। अयोध्या में उनके लिए समर्पित एक मंदिर है।

श्री सुमतिनाथ

श्री सुमतिनाथ का जन्म अयोध्या में मुहल्ला मोनधियाना राजघाट में हुआ था। वह जैन धर्म के 5 वें तीर्थंकर थे। यहां उन्हें समर्पित एक मंदिर है।

श्री विमलनाथ

श्री विमलनाथ का जन्म कांपिल में माघ महीने के प्रारम्भ से तीसरे दिन हुआ था। वे 13 वें तीर्थंकर थे जिनका जन्म कृतवर्मा और श्यामा देवी के यहाँ हुआ था।

श्री पद्म प्रभु

श्री पद्म प्रभु जैन धर्म के छठे तीर्थंकर है जो कौशांबी में पैदा हुए थे। श्री पद्म प्रभु ने कौशाम्बी में अपना ज्ञान प्राप्त किया था।

श्री अनंतनाथ

श्री अनंतनाथ 14 वें तीर्थंकर थे जो अयोध्या में वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष के 13 वें दिन पैदा हुए थे। उनके पिता सिहणसेन थे और माता सुयसा थीं।

श्री पार्श्वनाथ

जैन धर्म का 23 वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ का भेलपुरा में जन्म हुआ था। भेलूपुरा में श्री पार्श्वनाथ का 60 सेंटीमीटर लंबे सफेद और 75 सेमी लंबे काली मूर्ति है। श्री पार्श्वनाथ ने भिक्षुओं को जैन धर्म के पाँच व्रत सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी थी।

शंसापत्र