कृष्ण परिपथ

उत्तर प्रदेश की भूमि पर कुछ महत्वपूर्ण स्थल हैं जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ और उन्होंने अपने जीवन का एक मुख्य भाग बिताया। ये सभी स्थान एक साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के कृष्ण-परिपथ का गठन करते हैं। बड़ी संख्या में भक्त पूरे वर्ष इन स्थानों पर जाते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म लगभग 5000 साल पहले इस स्थान पर उनके मामा आततायी कंस की जेल में देवकी और वासुदेव के 8वीं संतान के रूप में हुआ था। इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के सात स्थानों अर्थात मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन और बलदेव शामिल हैं। ये सभी शहर भगवान कृष्ण से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं और भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं के साक्षी हैं।

गोवर्धन

पौराणिक कथा के अनुसार छोटा सा शहर गोवर्धन गिरीराज पर्वत पर बसा है। किंवदंतियों के अनुसार ब्रज के लोगों को देवराज इंद्र के कारण हुई मूसलाधार बारिश से बचाने के लिये इस पर्वत को छोटे कृष्ण ने 7 दिनों तक अपनी छोटी उंगली पर रखा था। आमेर के राजा भगवान दास द्वारा निर्मित सुरम्य पत्थर टैंक मानसी गंगा झील यहाँ एक प्रमुख आकर्षण है। अन्य लोकप्रिय स्थानों में कुसुम सरोवर, भरतपुर के राजा सूरज माल की छतरी, हरिदेव मंदिर, मुखरविंद जतिपुर, दानघाटी, उद्धवकुण्ड, चन्द्र सरोवर और राधा कुण्ड शामिल हैं।

गोकुल

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह देहाती गाँव यमुना के तट पर मथुरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यहाँ भगवान कृष्ण को गोपनीयता में पाला गया था। अगस्त के महीने में गोकुल कृष्ण जन्माष्टमी और नंदोत्सव के अभूतपूर्व उत्सव का साक्षी बनता है, जिसमें देश भर से आये भक्त विशाल मेले में सम्मिलित होते हैं। गोकुल में दाऊजी मंदिर, रक्षम समाधि, ब्रह्मानन्द घाट, गोकुल नाथ मंदिर, मोरवाला मंदिर, ठकुरानी घाट और नंद भवन हैं।

वृंदावन

मथुरा से 10 किमी दूर वृंदावन शहर स्थित है, यहाँ भगवान कृष्ण बड़े हए थे। यह स्थल नामानुकूल पवित्र तुलसी वन का क्षेत्र था जहाँ यमुना नदी के तट पर भगवान कृष्ण राधा और गोपियों के साथ आनन्द क्रीड़ाएँ करते थे। वृंदावन का शहर 5000 से अधिक मंदिरों का घरौंदा है। यह प्रत्येक वर्ष हजारों तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है। ये ब्रज में सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से मुख्य है। वृंदावन में कुछ बहुत खूबसूरत मंदिर और घाट हैं।

बरसाना

हिंदू लोकसाहित्य का मानना है कि यह स्थान भगवान कृष्ण की आत्मीय राधारानी का घर था। क्षेत्र में कई मंदिरों में से सबसे प्रमुख राधारानी मंदिर है जिसे लाडली या श्रीजी के रूप में जाना जाता है। यहाँ यात्रा के अन्य स्थानों में जयपुर मंदिर, पीली पोखर, मन मंदिर, संकरी खोर, दानगढ़ और मोर-कुटी, भानोखार टैंक, प्रेम सरोवर, रूप सरोवर इत्यादि शामिल हैं। यहाँ का मुख्य उत्सव राधारानी की जयंती है। महिला भक्त सुबह सुबह मंदिर की यात्रा करती हैं और मोर को लड्डू प्रस्तुत करती हैं क्योंकि यह राधारानी द्वारा भगवान...

मथुरा

मथुरा भगवान कृष्ण का जन्म स्थान है। यमुना नदी के तट पर स्थित 3000 वर्ष पुराना शहर सुंदर मंदिरों, संगीत, कलाओं और नृत्य से परिपूर्ण है जहाँ भगवान कृष्ण के मूल्यों को हर दिन जीवंत होते देख सकते हैं। अंतहीन मंदिर, स्वादिष्ट भोजन और मथुरा का हँसमुख माहौल आगंतुकों को मंत्रमुग्ध करता है। शहर के मंदिर एक महान ऐतिहासिक महत्व रखते हैं और प्रत्येक को भगवान कृष्ण के जीवन के अंश का अनुभव कराते है।

नंदगाँव

माना जाता है कि यह छोटा गांव भगवान कृष्ण के पालक पिता श्री नंदजी का घर है। बरसाना के उत्तर की ओर 8 किलोमीटर की दूरी पर यह नंदगाँव है। यहाँ एक पहाड़ी के शिखर पर नन्द राय मन्दिर स्थित है। यशोदा नंदन, नृत्य गोपाल, नंद नंदन, उधव क्यारो और गोपीनाथ के मंदिरों जैसे आकर्षण के लिए यहाँ अधिक यात्रा की जाती है। यहाँ से थोड़ा आगे पान सरोवर नाम की झील है, जहाँ श्री कृष्ण के पशु पानी पीते थे। यहाँ पान सरोवर से करीब 4 किमी की दूरी पर शानिदेव का प्रसिद्ध मंदिर है।

बलदेव

मथुरा के दक्षिण-पूर्व से 20 किमी दूर स्थित छोटा शहर बलदेव, बलदेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हर साल हज़ारों भक्त भगवान कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित होते हैं, बलराम यहाँ अपनी पत्नी रेवती के साथ अध्यक्षता करते है। यहाँ पूजित मूर्ति बलभद्र कुंड से जाने जाने वाले टैंक में पाई गई थी, यह क्षीर सागर के रूप में भी प्रसिद्ध है। दाऊजी का होरंगा के रूप में प्रसिद्ध एक भव्य होली उत्सव हर साल यहाँ आयोजित होता है, इसमें बड़ी संख्या में आगंतुक रंग में सराबोर...

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