अवध परिपथ

अवध क्षेत्र उत्तर प्रदेश के हृदय में स्थित है। यह अपने क्षेत्र की संस्कृति, व्यंजन, साहित्य और आध्यात्मिकता के लिए एक वैश्विक पहचान रखता है। लोग आज के आधुनिक और ऐतिहासिक समय के अवध का एकदम सही संयोजन देख सकते हैं। यह क्षेत्र शांति, सामंजस्य और कौशल की वजह से दुनिया भर में जाना जाता है। यह क्षेत्र स्मारकों और आध्यात्मिक स्थलों से परिपूर्ण है जो हर प्रकार के सैलानी के लिए उत्तम हैं।

नैमिषारण्य

नैमिषारण्य हिंदुओं के लिए तीर्थ यात्रा का एक पवित्र स्थान है जिसका वैदिक युग से महत्व है। यह जगह लखनऊ से 94 किमी दूर स्थित है। इस जगह का महाभारत समेत कई प्राचीन ग्रंथों में एक घने जंगल के रूप में उल्लेख मिलता है। यह चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी और सूरज कुंड जैसे प्राचीन मंदिरों की यात्रा के लिए निश्चित रूप से एक सार्थक यात्रास्थल है।

अयोध्या-फैजाबाद

अयोध्या और फैजाबाद के शहरों का अवध क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान है। अयोध्या को भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है, इसीलिये यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल केंद्र है। जबकि फैजाबाद अवध के नवाबों की गद्दी थी। इन दोनों जुड़वां शहरों में किनारों पर मौजूद मंदिरों और मस्जिदों को सभी वास्तुशिल्पों की भव्यता में देख सकते हैं। अयोध्या में रामकोट, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सूरजकुंड भारत के इतिहास का हिस्सा हैं। सरयू के घाट किसी का भी आध्यात्मिकता से साक्षात्कार करा सकते हैं।

देवा शरीफ

देवा शरीफ़ सूफी संत हाजी वारिस अली शाह का एक प्रसिद्ध तीर्थ है जो लखनऊ से लगभग 25 किमी दूर है। यह एक सुंदर तीर्थ है जो सभी समुदायों के भक्तों को आकर्षित करता है। नवंबर के महीने में यहाँ एक वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है। यह स्थान सार्वभौमिक भाईचारे का एक आदर्श उदाहरण है।

शंसापत्र